Friday, June 8, 2018


"अच्छा सुनो ना,"
कहीं चलते है,
कहीं पर भी,
किसी भी रास्ते पर.. 

जहाँ खूबसूरत मोड़ ना हो
वहाँ किसी का जोर ना हो.. 
जहाँ कपड़ों पर रंग ना हो
वहाँ वादों पर संग ना हो..

जहाँ चूल्हे का धुंआ हो,
तुम वो स्वेटर पहनो जो मैंने बुना हो..

जहाँ तुम्हे सिंदूर लगाना ज़रूरी ना हो,
वहाँ मेरे बिना तुम्हारी ज़िंदगी अधूरी हो..

जहाँ हम चाँद को एक-साथ देखते हो,
वहाँ सर्द रातोंं में अलाव यूँ सेंकते हो..

"
अच्छा सुनो ना,"

मैं चल निकला हूँ,
अभी नहीं बस कल निकला हूँ..
वादा है मिलेंगे कभी,
अपने सपने सिलेंगे कभी..


27/2/2014

"मैं तुम्हे मोह्हबत सिखा दूं.." 

हाँ मैं चाहता हूँ तुम मेरे ख्वाबों में आओ,
घंटों हम दोनों बैठ कर चाँद-चांदनी की मोह्हबत की बात करें..

हाँ, जानता हूँ ज़्यादा मिलते नहीं हैं हम,
एक बात जानती हो सूरज और चाँद भी नहीं मिलते..

पर हमेशा वो एक दूसरे की सलामती की दुआयें माँगते है,
बेशक वो दूर है एक-दूजे से फिर भी अपने बीच का सब जानते है..

तुम गुम हो अपने ख़्वाबों में,अपने किसी ख्याल में,
मैं भी उलझा हूँ तुम्हारे किसी सवाल में..  

चल कहीं इतना दूर निकल जाएँ जहाँ बस मैं और तुम रहो,
मैं चुप-चुप रहूँ और तुम सब कुछ कहो..

कल रात के बीचों-बीच दिल का समुन्द्र बोला मुझसे चल तेरे अन्दर की आग बुझा दूं,  
तभी मेरे अन्दर का "तुम" जाग उठी और मैं बोल उठा आओ मैं तुम्हे मोह्हबत सिखा दूं..


प्रवीण झा
15/5/2014

Sunday, May 13, 2018

ख़्वाब जो साथ पूरे करने थे आओ अब उन सभी ख़्वाबों को खुद से ही आग लगा दें ।   

इस दुनिया में कोई अकेला नहीं आया है सब आये एक याद लेकर जो पिछले जन्मों का फ़लसफ़ा है । तुम्हारी याद लेकर मैं इस दुनिया से चला जाऊँगा और कोई कोशिश करूँगा की इसका असर तुम पर ना पड़े । तुम्हारी हर बात मेरे कानों में ख़ून बनकर दौड़ने लगती है, शायद तुम्हें मेरा होना ही नहीं था लेकिन जब नहीं होना तो फिर तुम आई क्यूँ इस सवाल से मैं ज़िंदगी भर जूझता रहूँगा । तुमनें मुझे बहुत से ग़म दिए और बहुत सी ख़ुशियाँ भी दी लेकिन तक़लीफ़ की डेंसिटी तुम्हारी ख़ुशियों से कई गुना ज़्यादा दी थी ।

मैं इंसानो को बीच कभी नहीं पिसना चाहता और उसमे भी वैसे लोग जिन्हें ख़ुद की ज़िंदगी का अता-पता नहीं है लेकिन दूसरों को यूटोपिया दिखाकर उन्हें बरगलाना चाहते हैं । मेरे चाहत का मज़ाक बनाने वाले हर उस आदमी को जवाब देना होगा जो आजतक अपने चेहरे के पीछे एक गंदगी से भरी हुई सीरत लिए बैठे हैं । अब तुम जा चुकी हो जैसे तुम आई थी, तुम्हारे जाने से मैं बिखर सा गया हूँ, टूटा हुआ पहले से था । तुमनें उसमे थोड़ी और आग भर दी है, कभी अगर गलती से भी टकरा जाओ तो नज़रें मत मिलाना क्यूँ ख़्वामखाह में तुम्हारी नज़रें झुक जायेंगी और शायद तुम्हें अपनी गलती का एहसास शायद उस दिन हो जाए ।
पूरब और पश्चिम का वो गाना है ना, "अभी तुमको मेरी ज़रूरत नहीं, बहुत चाहने वाले मिल जाएंगे, अभी रूप का एक सागर हो तुम कँवल जितने चाहोगी खिल जाएंगे, दर्पण तुम्हें जब डराने लगे, जवानी भी दामन छुड़ाने लगे तब तुम मेरे पास आना प्रिय"


ये तस्वीर याद है ना जहाँ हम दोनों साथ गए थे और देखे थे कई ख़्वाब जो साथ पूरे करने थे आओ अब उन सभी ख़्वाबों को खुद से ही आग लगा दें ।   

जब हिम्मत नहीं होती तो प्यार नहीं करना चाहिए क्यूंकि इश्क़ एक जंग है और इसको जीतने का एक ही रास्ता है और वो है साथ, लेकिन तुम्हें साथ नहीं रहना था । तुम्हारे नए आशिक़ों को मेरा सलाम कहना और तुम्हारे नए ख़्वाबों को भी जो तुम मेरे बिना देख रही हो । अब मैं शायद तुमसे कभी ना मिलूं क्यूंकि मुझमें इत्तनी क़ुव्वत नहीं है की हर बार रुस्वा किया जाऊँ भरे बाज़ार में । तुम्हारे दिए हुए सभी तोहफे मैंने संभालकर रखे हुए हैं और वो फूलों का गुलदस्ता भी जो जो तुमनें उस रात आकर दिया था और चूम लिया था मेरे हाथों को । कहते हैं इश्क़ वो है पूरा नहीं हुआ लेकिन इस धोख़ेबाज़ी को क्या नाम दूँ ये मुझे बता दो । ख़ैर तुम्हारी इन सभी नाज़ायज़ हरकतों ने मुझे एक नया शगल दे दिया है और वो दुनिया के सामने आएगा । सुनों, वो तुम्हारे उन सभी मैसेज का क्या करूँ जिनमें तुमने बहुत से वादे किये हैं, उन सभी तस्वीरों का क्या करूँ ।

क्या, ऐसा करूँ की आग लगा दूँ क्या सबको ।   

तुम कहती हो मेरे और तुम्हारे बीच कुछ भी एक जैसा नहीं है, चलो अब इसी पर बात ख़त्म करते हैं ।
इसके बाद तुमने कहाँ कुछ भी कहने लायक छोड़ा है ।            

Sunday, May 6, 2018

जलती चिताओं के बीच ज़िंदगी अपनी तान को छेड़े रखती है ।

शायद ये हो जाता तो वो नहीं होता और वो होता तो कुछ नहीं होता । मेरी ज़िंदगी इस टाइम फ्रेम में अटक गई है, ज़हर के घूँट पी रहा हूँ ये जानते हुए की ये ज़हर मुझे शिव नहीं बनाएगा ।  शिव से शव की अवस्था में रहना ज़िंदगी है ।  दुआ के धागों में, जलती चिताओं के बीच ज़िंदगी अपनी तान को छेड़े रखती है ।  किसी के होने या ना होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता जब भी ये बात कोई कहे तो समझ जाना कि उसकी जान अटकी हुई है हलक में और किसी भी वक़्त निकल सकती है ।

मौत को रोमांटिक बनाना अपने आप में एक कला है लेकिन सच कहूँ दिल से ज़िंदगी से ज़्यादा रोमांटिक और कुछ नहीं । केदारनाथ सिंह ने कहा कि जाना हिंदी की सबसे खौफ़नाक क्रिया है, अगर ये सच नहीं है तो किसी को जाते हुए महसूस करना । जब वो जा रही थी तो मैं उसके हाथों को पता नहीं क्यूँ इस क़दर देख रहा था जैसे शायद पता नहीं अब अगले पल मुझसे क्या हो जाए । उसका जाना मुझे भीतर से तोड़ रहा था, मैं बहुत रोना चाहता था इस क़दर जैसे बरसों से नहीं रोया था ।





एक कमरे में उसकी यादों के साथ रोज़ मेरी रातें गुज़र जाती है थोड़ा घुटते हुए और लिखते हुए । लिखकर घुटन कम हो जाएगी ये सोचकर थोड़ा और घुट लेता हूँ । उसका दुप्पटा जो मेरे सिरहाने रखा रहता है, उसमें आज भी उसकी ख़ुशबू है वो ही ख़ुशबू जो उसकी शराब सी गर्दन के आसपास रहती है ।
उसने अपना दुप्पटा दे दिया था बहुत कुछ कहकर लेकिन ये नहीं कहा कि उसके बिना क्या करना है । मुझे समझ नहीं आता है कि मैं ज़िंदगी जी रहा हूँ कि किसी फ़िक्शन के स्क्रीनप्ले स्क्रिप्ट में फँस गया हूँ, जहाँ हर कैरेक्टर अपनी एक भूमिका निभा रहा है कर मेरा काम सिर्फ हर किसी को एक नदी किनारे से देखना है ।
कभी दुनिया के ढंग से हुए नहीं और जो तुम आ गई थी तब तक ऐसा लगा सारी दुनिया मेरी है । वो दुनिया जो मेरे दमघोंटू कमरे में रहती है जहाँ रौशनी कम है और यादें ज़्यादा है जहाँ एक रस्सी टंगी हुई है मौत के लिए और साथ ही जल रहा है एक दिया ज़िंदगी के लिए ।

Thursday, May 3, 2018

सुनों, तुम्हें गले से लगाना दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत एहसासों में से एक है । लेकिन ना जाने क्यूँ तुम्हें बड़ी जल्दी रहती है दूर जाने की, ना जाने क्यूँ सबको जल्दी रहती है । ख़्वाब टूटने तक तो ठीक है लेकिन दिल नहीं टूटना चाहिए क्यूंकि दिल टूटने की भयंकर आवाज़ होती है । मशहूर होने और गुमनाम रहने के बीच की जद्दोजहद आदमी को पागल कर देती है । उसे समझ ही नहीं आता कि वो क्या सही और क्या गलत कर रहा है, जैसे तुम्हें समझ नहीं आ रहा है कि तुम्हें जब क्या चाहिए और कब क्या कैसे कहना है । वैसे सच बताऊँ तो ये ज़रूरी भी नहीं है ।
मैं तुम्हारी सारी बातें समझ भी लूँ तो ख़ुद को ये कैसे समझाऊँ की तुम बस कन्फ्यूज्ड हो, कन्फ्यूज्ड लोगो का अलग साइंस होता है वो ख़ुद के साथ सारी दुनिया को कंफ्यूज़ समझते हैं, ख़ुदा के लिए उनके जैसा मत बनो । आधे प्यार करने वालों की दिक्कत ये है कि उन्हें ये पता नहीं लगता है कि कौन उनसे प्यार करता है और उनका काट रहा है ।




जिस प्रेशर की बात कह कर तुम मुझे समझाने की कोशिश करती हो मेरी जान प्रेशर में तो सारी दुनिया है इसका मतलब ये तो नहीं कि सही-ग़लत में फ़र्क करना बंद कर दिया जाए । सपनें तो सब देखते हैं लेकिन उन सपनों में जीते बहुत कम लोग हैं और उन काम लोगो की तादाद की वज़ह से ही ये दुनिया किसी तरह से चल रही है । प्यार करने वाले इसलिए भी कई बार बिछड़ जाते हैं क्यूंकि जब डिसीजन लेने की बारी आती है तो उनको उस वक़्त हड़प्पा से लेकर माया तक सबकी फ़िक्र होने लगती है । हिम्मत है साथ निभाने की तो हाथ पकड़ो, दुःख-सुख में साथ रहो नहीं तो बेमतलब का नाटक बंद कर देना चाहिए आज की जनरेशन को ।
प्यार कैफ़े में नहीं होता जान, प्यार तब होता है जब तेज़ बुख़ार हो और रात भर देखभाल करते हुए नींद ना आए और सुबह जब आँख खुले तो सामने पलकों के सामने लटकती जुल्फ़ें हो बेपरवाह सा चेहरा हो ।
और तुम चूम लो उसी तेज़ बुख़ार में मेरे माथे पर और फिर गले लग जाओ मेरे । ❤️


Tuesday, April 24, 2018

ख़ुद के मातम में ख़ुद ही रोये ज़ार-ज़ार ।
तुम मुझे कभी कभी दिल्ली सी लगती हो एकदम दिलफ़रेब और झूठी । दिल्ली ने हर किसी से झूठ बोला कि वो उससे बहुत मोह्हबत करती है । कितने सुल्तान आये और ना जाने कितने ज़मींदोज़ हो गए उसी धूलभरी मिट्टी में जिसपर वो हुक़ूमत करना चाहते थे । ख़ैर पुरानी आदत है मेरी की मैं सबको दिल्ली से मिलाने लगता हूँ लेकिन कभी नहीं सोचा था कि तुम किसी और से मिल पाओगी ।
तुम्हारी हँसती हुई तस्वीरें देखी, एक बात बताओ कैसे हँस लेती हो तुम इतना सब होने के बाद भी । मुझसे तो ऐसी झूटी हँसी नहीं लाई जाती है । मैं तुम्हारी तरह दिलफ़रेब नहीं हूँ ।
मुझे जलाने की नाक़ाम कोशिशें मत करो जान मैं बरसों पहले किसी अपने को फूँक आया हूँ, याद है ना । बरसों बात कुछ ख़्वाब देखने की हिम्मत लाया था कि शायद अब ज़िंदगी सामने है लेकिन नहीं जानता था कि तुम शायद दिल्ली की सल्तनत हो गई हो ।
ये तस्वीर देख रही हो ये हौज़ ख़ास है जहाँ पर इश्क़ के नए परिंदे उड़ान भरते हैं मेरी पसंदीदा जगहों में से एक है ये । 
अगर कभी तुम यहाँ जाओ किसी और के साथ तो कोई वादा मत करना क्यूंकि वादे ना निभाने की आदत है तुम्हारी ।



सुना है हम सब मर जायेंगे एक दिन और उस दिन एक अदालत बैठेगी जहाँ पर फ़ैसले सुनाए जाएंगे ज़िंदगी भर के मुझे उम्मीद है तुम नज़र मिलाकर बात कर पाओगी उस दिन मुझसे ।
वादे करने दुनिया की सबसे ओवररेटेड चीज़ है कोई भी कुछ भी वादा कर देता है और हम यक़ीन कर लेते हैं । तुम्हें किसी और के साथ देखकर बहुत दिल जल जाता है जानता हूँ कि आम आशिक़ों वाली हरक़त है ये लेकिन जान मेरा इश्क़ आम नहीं है । ये तुम्हारे उन "ख़ास लोगो" की तरह बाज़ार में नहीं बिकता है ।
ख़ास लोगो को मेरे तुम्हारे बीच आने से रोको ।
सुना है लिखने लगी हो और पता है ये एक अच्छी ख़बर है क्यूंकि ज़िंदगी तुमसे बहुत सवाल पूछेगी जहाँ मैं नहीं रहूँगा और तुम ज़्यादा बोलना पसंद नहीं करती हो शायद लिखना काम आ जाये ।

Sunday, April 8, 2018

"ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व नहीं करती है" ।
बहुत दिनों से कुछ लिखना चाह रहा था कि क्या सच में ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व करती भी है कि नहीं, सच्चाई ये है कि इस जनरेशन की औक़ात नहीं है कि ये प्यार कर सके और उसे निभा भी सके । किसी से प्यार का वादा और उसे निभाना किसी और से, सारी थ्योरी इसी पर आकर अटक गई है और इसलिए ये सारा आसमाँ ग़मज़दा हुआ जा रहा है ।


आज भी जब मेरी माँ कहती है कि तुम्हारे पापा के साथ हम लोग 2 रोटी-दाल में भी बहुत ख़ुश थे तो कभी-कभी लगता है ये तो यूटोपिया में रहने जैसा हुआ । लेकिन अब लगता है शायद वो ही दो वक्त किसी अपने साथ खाई हुई डाल रोटी ही सच है बाकी सब झूठ है और धोखा है । सारी कहानियाँ जिसके साथ लिखी लेकिन जब उसे निभाने आये तो सारे रोल बदल चुके थे । वो शख़्स जिसे आपकी सारी खूबियाँ और कमज़ोरियाँ पता हों वो आप पर यक़ीन करना छोड़ दें तो लगता है इस दुनिया को ख़त्म हो जाना चाहिए लेकिन ये दुनिया आपके मिटने से पहले नहीं मिटेगी ।
आज इश्क़ सिर्फ़ एक कॉमा जैसा हो गया जिसमें लोग कॉमा लगाकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं लेकिन मैं कॉमा नहीं फुलस्टॉप वाला हूँ । इस जनरेशन को लगता है किसी के साथ 2 मिनट रहकर और 2 मिनट बात करके वो अपना हो जाएगा । किसी को अपना बनाना है तो त्याग करना होगा जो आप कर नहीं पाएंगे । रिश्ता वो होता है जो दुनिया की बातों में आकर टूटता नहीं है बल्कि और भी मजबूत हो जाता है ।
लेकिन नहीं ऐसा कभी नहीं होगा अब, ना इस जनरेशन में और ना आने वाली सभी जनरेशन में क्यूंकी आजकल इश्क़ में लोग किसी के साथ भी सो जाते हैं लेकिन किसी के इश्क़ में जाग नहीं पाते ।
क्यूंकि ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व नहीं करती है ।
"साला ये दुनिया के सारे कोट्स मर्दों के ख़िलाफ़ हैं" ।
बहुत से लोगों को मुझसे बड़ी तक़लीफ़ है सच कहूँ तो मुझे भी ख़ुद से बड़ी तक़लीफ़ है जो शायद अब मौत के दिन ही ख़त्म हो पाएगी लेकिन मेरी जान मरोगी तो तुम भी और उस दिन तुम्हारी गिरेबाँ पकड़ कर पूछुंगा तुमसे की इतना झूठ कैसे बोल सकती हो । जब हाथ थामना ही नहीं था तो पकड़ा क्यूँ ।
बॉब मार्ले ने कभी कहा था कि एक औरत के दिल में इश्क़ को जगाकर धोखा करना दुनिया का सबसे ग़लत काम है, लेकिन जब यही काम एक औरत करें तो उसका क्या करें किस तराज़ू में तोले उसे । कैसे जज करें । कौन सा वाइन का ग्लास लेकर उसको बा इज़्ज़त बरी कर दें ।एक तो साला ये दुनिया के सारे कोट्स मर्दों के ख़िलाफ़ क्यूँ बने हैं । जब लोग कहते हैं प्यार करो तो निभाओ चाहे मरकर या ज़िंदा रहकर लेकिन जब निभाने की बारी आती है तो सारा प्यार हवा हो जाता है ।
तुम, तुम्हारा परिवार, तुम्हारी ख़्वाहिशे, तुम्हारी आज़ादी, तुम्हारे दोस्त,तुम्हारी ज़िंदगी सब कुछ तुम्हारा लेकिन हमारा क्या । हमारे हिस्से बस आती हैं ज़िम्मेदारी जो हमें चाहे मरकर या जीते जी निभानी ही हैं । जब पहली बार कोई मिलता है और तुम्हें लगता है कि वो तुम्हारे लायक नहीं हैं तो उसे तभी मना कर दो और कह दो कि वो अपनी औक़ात में रहे लेकिन जब इश्क़ कर लिया और निभाने की बारी आई तो हाथ मे वाइन ग्लास वाला फेमिनिस्म को शायद मैं हर बार ठुकरा दूँ।
अगर औरत की आज़ादी है तो मर्दों को भी आज़ादी होनी चाहिए । हर जगह दबकर रहो, सबकी सुनो, सारी ज़िम्मेदारी पूरी करो, बीवी को संभालो बच्चे पैदा करो और एक दिन साला कुत्ते की मौत मर जाओ । पहले ख़ुद से लड़ाई लड़ो फिर अपने सपनों से लड़ो, फिर लड़ो ख़ुद की ज़िंदगी से और एक दिन मर जाओ ये कहकर की मैं हार गया ।


झूट बोलने वालों ने दुनिया पर कब्ज़ा किया हुआ है एयर उनका ही रहेगा । जिन लोगों का ख़ुद भविष्य ख़तरे में है वो दूसरों की ज़िंदगी का फ़ैसला कर रहे हैं । बिना पढ़े लिखे दूसरों के रिश्तों में ज़हर घोल रहे हैं । ख़ुद का ठिकाना नहीं है लेकिन सबको "आज़ादी" दिलवाएंगे ।
किसी के रिश्ते में ज़हर घोल दें अगर आज़ादी है तो मैं पेशाब करता हूँ ऐसे लोगों पर । जिस रिश्ते में रहकर आप भविष्य के ख़्वाब बुनते हैं उसी रिश्ते को आप एक दिन कह देते हैं, "जाओ मेरा हो गया, अब मुझसे संभाला नहीं जा रहा" ।
सुनो इस बात का फ़ैसला होगा क़यामत के रोज़ जिस दिन तुम्हें देना होगा जवाब तुम्हारी हर एक ख़ता का । बाकी उन सभी लोगों के लिए दिल से बद्दुआएं निकलती हैं, आपकी ज़िंदगी का फ़ैसला आपके कर्म करेंगे ।
और सच बताऊँ तुम्हारी हैसियत नहीं है कि तुम मुझसे इश्क़ निभा पाओ ।

Tuesday, April 3, 2018

"यूँ हो कि नफ़रत हो जाए तुमसे" ।


कितना आसान होता है ना सब कुछ भूल जाना, मुझे उम्मीद है तुम मुझे और मेरे इश्क़ को भूल चुकी होगी । कुछ याद होगा तो ज़रूर बताना ख़ुद को और महसूस करना गर्माहट उन हाथों की जो तुम्हारे गालों पर प्रेमी की तरह कम और पिता की तरह ज़्यादा महसूस होती थी । ये उसी दिन की बात है जब तुम मेरे साथ सात जन्म के वादे कर रही थी और ये भी कह रही थी कि आप मुझे कभी छोड़कर मत जाना । लेकिन जानाँ तुमनें ख़ुद को झूठा बना लिया । ख़ैर इसका हिसाब होगा किसी रोज़ जब तुम बैठी होगी किसी अमीर, औहदेदार और ख़ूबसूरत आदमी की मल्लिका बनकर लेकिन सच कह रहा हूँ तुम्हें फ़िर उस वक़्त याद आएगी उसी गर्माहट की जो मेरे हाथों में है ।

आँखों पर पड़े पर्दे को कोई और नहीं हटा सकता लेकिन कोशिश की जानी चाहिए । तुम भी दुनिया जैसी हो गई हो क्या जो कमज़ोर है, डरी हुई है, लेकिन मजबूत रहने का गुमाँ रखे हुए है । जिस दिन तुम मुझसे टकराना यूँ ही राह चलते हुए तो कोशिश करना नज़र मिलाने की लेकिन मैं जानता हूँ तुम नहीं मिलाओगी नज़रें क्यूंकि तुम घबराती हो अपने आप से, दूसरों की नज़र से दुनिया नहीं देखी जाती । मैंने बहुत कोशिश की जिससे तुम नज़र पैदा करो लेकिन उससे हमारे बीच तुमनें फ़ासले पैदा कर लिए । आज यूँ करना कि ख़ुद को आईने में देखना और हाँ ग़ौर से देखना जिससे तुम्हें एहसास हो कि तुमनें खोखली दुनिया को चुन लिया है, खोखले लोग चुन लिए हैं, सफ़ेदपोश कपड़े पहनने वाले शहरी जंतु, जिन्हें कंक्रीट के जंगलों में रहना पसंद है, जो एक दूसरे की ज़िंदगी में करते हैं दख़लअंदाज़ी ।
सुनो, अब वादे मत करना किसी से जब तुम निभा ना सको, ख़ुद को इतना झूठा मत बनाओ, कोशिश करो ख़ुश रहने की । अब किसी से प्यार मत करना क्यूंकि तुम नहीं कर पाओगी । याद है ना वो अनगिनत ग़ुलाब के फूल जो मैं लाता था तुम्हारे लिए जब भी तुम उदास होती थी, याद है ना अनगिनत रातें जब मैंने तुमसे बात करते हुए नींद को कभी हमारे बीच में नहीं आने दिया । याद है सब कुछ जिसे याद रहना चाहिए, हाँ सब कुछ याद रखना और हो सके तो आज रोना फूटकर जिससे आँखों के नीचे काले धब्बे पर जायें और वो सभी स्याह ख़्याल निकल जाए जो तुम्हारे भीतर हैं ।
एक दिन आएगा जब तुम्हें मेरे सामने ख़ुदा लाएगा, मुझसे नज़रें मत मिलाना क्यूंकि मेरी आँखें अब लाल हो गई, नींद आती नहीं, खाना भाता नहीं । दुनिया मज़ाक उड़ाती है मेरे अकेलेपन का । मैं जानता हूँ कि ये दुनिया एक दिन ग़म करेगी अपनी एक-एक हरक़त का जो ये मेरे दिल को दुखाने में कोई कसर नहीं रख रही है फ़िलहाल, एक दिन यही लोग मुझे बिठाएंगे अपनी पलकों पर और चूमेंगे मेरे हाथों को जैसे मैं चूमता था तुम्हें । 

Friday, March 30, 2018

"मरने से पहले कोई नहीं मरता, लोग जीते जी मर जाते हैं" ।
ये कोई ख़्वाब है क्या जो मैं देख रहा हूँ, तारे जो मेरे भीतर टिमटिमा रहे हैं तुम्हें सोचने के बाद । क्या तुम यहाँ हो जहाँ तुम्हें होना चाहिए या तुम जा चुकी हो किसी और की बाहों में । तुम्हें नहीं मिलेगी वैसी गर्माहट जैसी मेरी मौजूदगी में रहती है । तुम्हारी बातें अभी तक मेरे कानों में गूंज रही हैं कि मैं प्यार नहीं करती शायद कोई धोखा हुआ है आपको । क्या ख़्वाब यूँ ही टूट जाते हैं इश्क़ में, क्या वादा तोड़ने के लिए करते हैं ।



जानती हो उस दिन जब मैं तुम्हारे लिए लाया था कानों की बालियाँ तो मैंने उसे ख़ुद पहनकर देखा था बार-बार ये देखने के लिए की ये बालियाँ मुझपर कैसी लगती हैं क्यूंकि मुझमें हर वक़्त रहती हो तुम । क्या मेरे अंदर की स्याह सच्चाई से परेशां हो तुम । क्या तुमनें कभी कोशिश की जानने की किन रास्तों पर चला हूँ मैं ।
किस बोझ को उठाता हूँ रोज़ अपने दिल के भीतर ।
वो जो मेरी उंगलियां तैर रही थी तुम्हारी कमर के आसपास उन्हें भी पता था कि उनकी मंज़िल कुछ भी नहीं लेकिन ज़िंदगी में कोई मंज़िल हो ये ज़रूरी भी तो नहीं । क्या तुम्हें किसी ने गले से लगाया है जैसे सिमट जाती हो तुम मुझमें । तुम जब कहती हो तो मैं ख़ुद को समझने लगता हूँ एक आकाशगंगा जिसमें समाये हैं, करोड़ों तारे । तुम मेरा सबसे चमकदार तारा हो आओ टूट जाये एक दूसरे के दरम्यान ।
हम दोनों रहेंगे एक ही आसमाँ के नीचे, देखेंगे फूल और मौसम को बदलते हुए । जब सब टूटकर बिखर जाएगा तो शायद तुम्हारी आँख से टपका आँसू टूटकर गिरे तुम्हारी उन बोझिल पलकों से जिन पलकों से सैंकड़ो बार निहारा है तुमनें मुझे । तुम्हारे आँसुओ से शायद हो जाये रेगिस्तान में रिमझिम बारिश और शायद फिर पैदा हो ज़िंदगी फिर से ।
बहुत टूटा है मुझमें मेरा हिस्सा, तुम्हें भी तो एहसास होना चाहिए कि ज़िंदगी में टूटना किसे कहते हैं जानाँ ।
"कैली मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ" ।
विल्सन हम शायद कामयाब हो जाएं ये विचार तुम्हारे दिमाग़ में नहीं आया कभी, हो सकता है मैं वहाँ सागर पर अपनी क़िस्मत बेहतर आजमाऊँ बजाए यहाँ मरने के इस बेकार, बेजार द्वीप पर बाकी की अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हुए एक वॉलीबॉल के साथ बात करते हुए ।
मेरी पसंदीदा फिल्म्स में से एक है टॉम हैंक्स की कास्ट अवे जिसमें चक नॉलैंड एक द्वीप पर 4 साल तक अकेले फँस जाता है क्यूंकि जिस प्लेन से वो यात्रा कर रहा था वो अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है । चक नॉलैंड की प्रेमिका "कैली" जो इस ख़बर को सुनकर सदमें में चली जाती है जब चक के ज़िंदा होने की ख़बर एक दिन अचानक उसे फ़ोन पर मिलती है । चक एक कूरियर कंपनी में काम करता है तो उस कार्गो प्लेन से ये वॉलीबॉल उसे समंदर में तैरते हुए मिल जाती है । चक इस वॉलीबॉल से बात शुरू कर देता है और इसका नाम "विल्सन" रख देता है और दोनों की दोस्ती इंसानों की दोस्ती से बेहतर हो जाती है ।
चक नॉलैंड का किरदार मेरे सबसे क़रीब क्यूंकि जिस हिसाब से उस किरदार की झिझक,प्रेम,परेशानी, ख़्वाब और ख़्वाब का टूटना दिखाया है अगर आप देखेंगे तो आपको भी ख़ुद में एक चक नज़र आएगा जिसे अंत में कैली नहीं मिलती और वो बारिश भरी रात में कैली को आख़िरी बार जी जान से होंठों पर चूमने के बाद कहता है, "मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ कैली, बेहद प्यार करता हूँ तुमसे" । लेकिन फिर थोड़ी देर बाद कहता है "घर जाओ कैली" । कैली घर चली गई लेकिन शायद ये फ़िल्म कभी ख़त्म नहीं होगी क्यूंकि कैली घर ज़रूर चली गई वापस लेकिन दिल से कभी नहीं जा पाई ।
बाकी हम सबको चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के "विल्सन" को ढूँढे अगर बाहर नहीं मिलता तो कोई बात कई बार बहुत से राज़ और ग़म एकसाथ सीने में दफ़्न होते हैं । ज़रा सा अपने ग़मों को कुरेद दीजिये बाहर आ जायेंगे मोतियों की तरह ।
हम सबकी ज़िंदगी में चक नॉलैंड और कैली जैसा एक उलझा प्रेम ज़रूर रहता है, जहाँ पर दो लोग तय ही नहीं कर पाते कि उन्हें साथ रहना चाहिए या नहीं लेकिन जब वो दूर जाते हैं तो सब टूट जाता है । ख़ैर अब जब जाना हो गया है तो तमाशा ज़रूरी है क्यूंकि मैंने कहा था ना इश्क़ तमाशा है मेरा । ❤️
*नोट: ये तस्वीर विल्सन की है जो चक से बाद में बिछड़ गया ।

शायद ये जानते हुए की.... शायद ये जानते हुए की जानकार कुछ नहीं होगा मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ की तुम कैसी हो, खाना टाइम पर खा लेती होना ...