"ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व नहीं करती है" ।
बहुत दिनों से कुछ लिखना चाह रहा था कि क्या सच में ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व करती भी है कि नहीं, सच्चाई ये है कि इस जनरेशन की औक़ात नहीं है कि ये प्यार कर सके और उसे निभा भी सके । किसी से प्यार का वादा और उसे निभाना किसी और से, सारी थ्योरी इसी पर आकर अटक गई है और इसलिए ये सारा आसमाँ ग़मज़दा हुआ जा रहा है ।
आज भी जब मेरी माँ कहती है कि तुम्हारे पापा के साथ हम लोग 2 रोटी-दाल में भी बहुत ख़ुश थे तो कभी-कभी लगता है ये तो यूटोपिया में रहने जैसा हुआ । लेकिन अब लगता है शायद वो ही दो वक्त किसी अपने साथ खाई हुई डाल रोटी ही सच है बाकी सब झूठ है और धोखा है । सारी कहानियाँ जिसके साथ लिखी लेकिन जब उसे निभाने आये तो सारे रोल बदल चुके थे । वो शख़्स जिसे आपकी सारी खूबियाँ और कमज़ोरियाँ पता हों वो आप पर यक़ीन करना छोड़ दें तो लगता है इस दुनिया को ख़त्म हो जाना चाहिए लेकिन ये दुनिया आपके मिटने से पहले नहीं मिटेगी ।
आज इश्क़ सिर्फ़ एक कॉमा जैसा हो गया जिसमें लोग कॉमा लगाकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं लेकिन मैं कॉमा नहीं फुलस्टॉप वाला हूँ । इस जनरेशन को लगता है किसी के साथ 2 मिनट रहकर और 2 मिनट बात करके वो अपना हो जाएगा । किसी को अपना बनाना है तो त्याग करना होगा जो आप कर नहीं पाएंगे । रिश्ता वो होता है जो दुनिया की बातों में आकर टूटता नहीं है बल्कि और भी मजबूत हो जाता है ।
लेकिन नहीं ऐसा कभी नहीं होगा अब, ना इस जनरेशन में और ना आने वाली सभी जनरेशन में क्यूंकी आजकल इश्क़ में लोग किसी के साथ भी सो जाते हैं लेकिन किसी के इश्क़ में जाग नहीं पाते ।
क्यूंकि ये जनरेशन इश्क़ डिज़र्व नहीं करती है ।

No comments:
Post a Comment