Saturday, February 6, 2016

यहाँ सब कुछ वैसा नहीं रहता जैसा हम सोच रहे होते हैं, तुमनें उम्मीद खो दी है क्या ! मैं अब भी देखता हूँ सूर्य को सूर्यास्त तक, और इंतज़ार करता हूँ इसी यक़ीन पर की वो सुबह फिर उग आएगा ! कुछ उम्मीदें ख़त्म नहीं होनी चाहिए, मैं तुम्हें हर जगह पाता हूँ ! तुम सह रहे हो, कोई बात नहीं सहना अच्छी बात है, शायद तुम चुने गए हो ! वो सुबह देखने के लिए जहाँ तुम्हेँ होना है मुस्कुराते हुए ! तुम अपने भीतर संगीत पैदा करो जैसे एक माँ जन्म देती है अपनी औलाद को तुम भी जन्म देना उस माहौल को जहाँ बस खुशियाँ हो ! चाहे रास्ते कैसे भी हो तुम आगे बढ़ते जाना, निरंतर !

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