Saturday, February 6, 2016

"गुस्ताख़ चश्मा"
चाँद कुछ दिनों से धुँधला सा दिख रहा है
"
चश्मा टूट गया है"
शायद ज़िंदगी का भी
दिनभर थक कर घर आने के बाद जब
वो कुछ लिखने की कोशिश करता
उसे ऐसा लगता चाँद उसकी खिड़की से
चार मीटर आगे खिसक गया है
बस अँधेरे कमरे में बैठा
चारों तरफ का धुँआ कभी-कभी उसकी
आँखों और आत्मा को झुलसा देता है..
#प्रवीण 

No comments:

Post a Comment

शायद ये जानते हुए की.... शायद ये जानते हुए की जानकार कुछ नहीं होगा मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ की तुम कैसी हो, खाना टाइम पर खा लेती होना ...