"गुस्ताख़ चश्मा"
चाँद कुछ दिनों से धुँधला सा दिख
रहा है
"चश्मा टूट गया है"
शायद ज़िंदगी का भी
दिनभर थक कर घर आने के बाद जब
वो कुछ लिखने की कोशिश करता
उसे ऐसा लगता चाँद उसकी खिड़की से
चार मीटर आगे खिसक गया है
बस अँधेरे कमरे में बैठा
चारों तरफ का धुँआ कभी-कभी उसकी
आँखों और आत्मा को झुलसा देता है..
"चश्मा टूट गया है"
शायद ज़िंदगी का भी
दिनभर थक कर घर आने के बाद जब
वो कुछ लिखने की कोशिश करता
उसे ऐसा लगता चाँद उसकी खिड़की से
चार मीटर आगे खिसक गया है
बस अँधेरे कमरे में बैठा
चारों तरफ का धुँआ कभी-कभी उसकी
आँखों और आत्मा को झुलसा देता है..
#प्रवीण
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